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लाहौर हाईकोर्ट को बताया गया, कोहिनूर पाकिस्तान वापस नहीं लाया जा सकता

पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर हाई कोर्ट को सूचित किया है कि कोहिनूर हीरे को वापस नहीं लाया जा सकता क्योंकि महाराजा रणजीत सिंह ने 1849 में ईस्ट इंडिया कंपनी से समझौता किया था जिसके तहत कीमती हीरा ब्रिटेन को दिया गया था। इसलिए ब्रिटेन सरकार से हीरा लौटाने के लिए नहीं कहा जा सकता।

भाषा 27 Apr 2016, 9:21 pm
लाहौर
नवभारतटाइम्स.कॉम koh i noor cant be brought back to pak lahore high court
लाहौर हाईकोर्ट को बताया गया, कोहिनूर पाकिस्तान वापस नहीं लाया जा सकता

पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की सरकार ने यहां हाई कोर्ट को सूचित किया है कि विख्यात कोहिनूर हीरे को वापस पाकिस्तान नहीं लाया जा सकता क्योंकि उसे 1849 में 'लाहौर संधि' के तहत ब्रिटेन को सौंपा गया था।

प्रांतीय सरकार के एक विधि अधिकारी ने मंगलवार को अदालत में कहा, 'महाराजा रणजीत सिंह ने 1849 में ईस्ट इंडिया कंपनी से समझौता किया था जिसके तहत कीमती हीरा ब्रिटेन को दिया गया था। इसलिए ब्रिटेन सरकार से हीरा लौटाने के लिए नहीं कहा जा सकता।'

लाहौर हाई कोर्ट एक अर्जी पर सुनवाई कर रहा था जिसमें पाकिस्तान सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह कोहिनूर वापस लाए जिसे सालों से भारत भी ब्रिटेन से हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

याचिकाकर्ता एवं वकील जावेद इकबाल जाफरी ने यद्यपि सरकार की दलील का विरोध किया और कहा, 'दोनों सरकारें कानून के तहत ऐसे किसी समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत नहीं थीं।'

जस्टिस खालिद महमूद खान ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वह तत्कालीन शासक रणजीत सिंह और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए समझौते की एक प्रति दो मई को अगली सुनवाई के दौरान पेश करें। जाफरी ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि ब्रिटेन ने रणजीत सिंह के पोते दलीप सिंह से हीरा छीन लिया था और उसे ब्रिटेन ले गया था।

उन्होंने कहा, 'हीरा महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के मुकुट का हिस्सा बना था जब उनकी 1953 में ताजपोशी हुई थी। महारानी एलिजाबेथ का कोहिनूर पर कोई अधिकार नहीं है जिसका वजन 105 कैरट और कीमत अरबों रुपये है।'

उन्होंने अदालत से संघीय सरकार को हीरा ब्रिटिश सरकार से वापस लाने का निर्देश देने की मांग की और दावा किया कि कोहिनूर हीरा पंजाब प्रांत की एक 'सांस्कृतिक विरासत' है और वास्तव में वह उसके नागरिकों का है।

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