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Imran Khan: भारत को घेरने के लिए चीन के रास्‍ते श्रीलंका को साधने में जुटे इमरान खान, दिया CPEC का 'लालच'

Imran Khan Sri Lanka Visit: पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने भारत को च‍िढ़ाने के ल‍िए अब श्रीलंका को CPEC का ऑफर द‍िया है ज‍िसका भारत कड़ा व‍िरोध करता रहा है। इमरान ने कहा क‍ि भविष्य में श्रीलंका को मध्य एशिया तक पाकिस्तान के संपर्क से फायदा हो सकता है।

एजेंसियां 24 Feb 2021, 11:16 am

हाइलाइट्स

  • इमरान खान ने श्रीलंका को अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का लालच दिया है
  • इमरान ने कहा कि पाकिस्‍तान सीपीईसी के जरिये के साथ संबंधों को बढ़ाने की दिशा में देख रहा
  • उन्‍होंने कहा कि श्रीलंका पहले ही चीन के महत्‍वकांक्षी बेल्‍ट एंड रोड कार्यक्रम का हिस्‍सा है

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नवभारतटाइम्स.कॉम imran khan
श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ वार्ता करते इमरान खान
कोलंबो/ इस्‍लामाबाद
चीनी ड्रैगन के साथ मिलकर भारत की चौतरफा घेरेबंदी में जुटे पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अब श्रीलंका को अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का लालच दिया है। श्रीलंका के दौरे पर पहुंचे इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्‍तान सीपीईसी के जरिये श्रीलंका के साथ कारोबारी संबंधों को बढ़ाने की दिशा में देख रहा है। उन्‍होंने कहा कि श्रीलंका पहले ही चीन के महत्‍वकांक्षी बेल्‍ट एंड रोड कार्यक्रम का हिस्‍सा है और सीपीईसी उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
श्रीलंकाई प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ मुलाकात के बाद अपने संबोधन में खान ने कहा कि उनके पहले दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, 'यह हमारे कारोबारी संबंधों को मजबूती देने के लिये है। पाकिस्तान चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है, सीपीईसी इसका एक ध्वजवाहक कार्यक्रम है।' खान ने कहा कि सीपीईसी का मतलब मध्य एशिया तक संपर्क कायम होने से है।
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बीआरआई की कड़ी आलोचना करता है भारत
पाकिस्‍तानी पीएम ने कहा, 'हमने उन क्षेत्रों के बारे में चर्चा की जहां हम अपने कारोबारी संबंधों को बढ़ा सकते हैं, जहां भविष्य में श्रीलंका को मध्य एशिया तक पाकिस्तान के संपर्क से फायदा हो सकता है। और हमारे कारोबारी संबंधों का यह मतलब भी है कि दोनों देश साथ चलेंगे।' बलोचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाली सीपीईसी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रॉजेक्‍ट है।

भारत बीआरआई की कड़ी आलोचना करता है क्योंकि इसके तहत आने वाला 50 अरब डालर का सीपीईसी पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि खान और महिंदा ने यहां श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास ‘टेंपल ट्रीज’ में अकेले में मुलाकात की। इसमें कहा गया कि इस बैठक के बाद खान और महिंदा के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता हुई। खान ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद से लड़ने में श्रीलंका की मदद करके खुशी होगी।

इमरान ने कहा कि पर्यटन इस द्वीपीय राष्ट्र के विकास और वृद्धि का प्रमुख स्रोत है लेकिन आतंकवाद ने इसमें रुकावट पैदा की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार रहा है और बीते 10 वर्षों में पर्यटन खत्म हो गया और आतंकवाद के खतरे के कारण विदेशी निवेश भी नहीं आ रहा। कोविड-19 महामारी के बाद श्रीलंका की यात्रा करने वाले पहले राष्ट्राध्यक्ष खान बुधवार को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित एक संयुक्त ‘व्यापार और निवेश सम्मेलन’ में भी खान हिस्सा लेंगे।


2016 के दौरे के बाद किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का पहला दौरा
इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिये कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किये जाएंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पदभार 2018 में संभालने के बाद खान का यह पहला श्रीलंका दौरा है। इससे पहले, वह 1986 में श्रीलंका आए थे, जब वह पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान थे। उस दौरान टेस्ट मैच की श्रृंखला में उन्होंने स्थानीय अंपायरों पर पक्षपात का आरोप लगाया था। नवाज शरीफ के 2016 में श्रीलंका के दौरे के बाद यह किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का पहला श्रीलंका दौरा है।

खान के दौरे से पहले श्रीलंका सरकार ने उनके संसद के संयुक्त सत्र के प्रस्तावित संबोधन के कार्यक्रम को पिछले हफ्ते रद्द कर दिया था। सरकार ने ऐसा करने के पीछे कोविड-19 महामारी का हवाला दिया था। ऐसा कहा जाता है कि पाकिस्तानी सरकार के अनुरोध पर खान के कार्यक्रम में संसद को संबोधित करने को शामिल किया गया था। यह संबोधन 24 फरवरी को होना था। डॉन अखबार ने कहा कि श्रीलंकाई सरकार में कुछ ऐसे तत्व थे, जो यह नहीं चाहते थे कि यह संबोधन हो क्योंकि उन्हें डर था कि इससे भारत के साथ देश (श्रीलंका) के संबंधों को और नुकसान पहुंच सकता है जो पहले से ही कोलंबो बंदरगाह पर ईस्ट कंटेनर टर्मिनल करार के रद्द होने से तनावपूर्ण हैं।

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