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पनामागेट: नवाज शरीफ की छुट्टी भारत के लिए अच्छी खबर नहीं

पनामागेट मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने वजीरे आजम नवाज शरीफ को दोषी करार देते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिया है। नवाज की छुट्टी भारत के लिए परेशानियां खड़ी कर सकती है। पाकिस्तान की राजनैतिक अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ेगा।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 28 Jul 2017, 2:26 pm
इस्लामाबाद/नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम nawaz sharif
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने पनामागेट केस में नवाज शरीफ को दोषी ठहराया है...

नवाज शरीफ तीसरी बार भी प्रधानमंत्री का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकेंगे। पनामागेट मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद इस्तीफा दे दिया है। इसपर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने वजीरे आजम नवाज शरीफ को दोषी करार देते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिया है। पाकिस्तान चुनाव आयोग ने भी तत्काल कार्रवाई करते हुए नवाज की योग्यता को खारिज करने का आदेश दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अपने आप में ऐतिहासिक है। भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप नवाज और उनके परिवार को इतने भारी पड़ेंगे, इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। पाकिस्तान पर तो इस फैसले का असर पड़ेगा ही, साथ में भारत भी इसके असर से अछूता नहीं रहेगा। पाकिस्तान में मजबूत लोकतांत्रिक सरकार भारत के हितों के अनुरूप है। वहां एक लोकप्रिय नेता का सत्ता में न होना या फिर सेना का सरकार पर हावी हो जाना, दोनों ही स्थितियां भारत के लिए अच्छी नहीं हैं। पाकिस्तान में अगला आम चुनाव 2018 में होना है। अभी यह साफ नहीं हो सका है कि नवाज के जाने के बाद शासन की बागडोर कौन संभालेगा।

पढ़ें: पनामागेट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवाज को माना दोषी, PM पद के लिए अयोग्य ठहराया

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के पद पर नवाज का न होना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जा सकती है। आने वाले हफ्तों या महीनों में इसका भारत पर भी असर होगा, विशेषकर सुरक्षा के मामले में। सत्ता में परिवर्तन का मतलब है कि इस्लामाबाद में नए 'खिलाड़ी' और नए मुद्दे होंगे। गवर्नेंस और विदेशी नीति का काम रावलपिंडी में सेना के हवाले हो जाएगा। सेना को गवर्नेंस में आगे लाना स्पष्ट रूप से घातक होगा। शरीफ अभी भी पाकिस्तान में लोकप्रिय हैं। अशफाक कियानी से लेकर कमर बाजवा तक लोकतांत्रिक सरकार को हटाने के अनिच्छुक दिखे हैं, भले ही वह देश को पर्दे के पीछे से चला रहे हों। पाकिस्तानी सेना पारंपरिक तौर पर ही भारत के लिए पूर्वाग्रहों से भरी है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी सेना और ISI किस तरह भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों की मदद करते हैं यह भी किसी से नहीं छुपा।


अब जबकि नवाज के आगे का रास्ता बिल्कुल बंद होता हुए दिख रहा है, तो इससे पाकिस्तान में अस्थिरता आने की आशंका है। इस अस्थिरता का परिणाम भारत को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्तान जब भी मुसीबत में होता है वह भारत और कश्मीर पर फोकस बढ़ा देता है। पाकिस्तान स्थित आंतकी समूहों ने दिखाया है कि वे जम्मू-कश्मीर तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं, जैसा कि हाल में अमरनाथ यात्रियों पर अटैक किया गया। यह कश्मीर घाटी में हिंसा को बढ़ाने का प्रयास हो सकता है ताकि सिविलियन गवर्नमेंट को बनाए रखने के अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाव किया जा सके। नई दिल्ली में सत्ता का गलियारा भी इस बात पर सहमत नजर आता है। यहां भी शरीफ के बाद संभावित परिस्थितियों पर बात हो रही है। आम चुनाव में सिर्फ कुछ महीने का समय बचा है और यदि सेना लोकतांत्रिक मुखौटे को सुरक्षित रखना चाहती है तो शरीफ सरकार को तब तक बने रहने दे सकती है। दूसरा यह कि शरीफ के छोटे भाई शाहबाज दायित्व संभाल सकते हैं।

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