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Watch: ईशनिंदा में श्रीलंका के नागरिक को जिंदा जलाने वाले पाकिस्तानी हैवानों से मिलिए, तर्क सुनकर दंग रह जाएंगे

Blasphemy in Pakistan: अमेरिकी सरकार के सलाहकार पैनल की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के किसी भी देश की तुलना में पाकिस्तान में सबसे अधिक ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल होता है।

Curated byयोगेश मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 4 Dec 2021, 11:53 am
इस्लामाबाद
नवभारतटाइम्स.कॉम pakistan
Photo : Twitter/Tarek Fatah

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भीड़ ने शुक्रवार को श्रीलंका के एक नागरिक की कथित तौर पर ईशनिंदा के मामले में पीट-पीटकर हत्या कर दी और फिर उसके शव को जला दिया। पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि लाहौर से करीब सौ किलोमीटर दूर सियालकोट जिले की एक फैक्टरी में करीब 40 वर्षीय प्रियंता कुमारा महाप्रबंधक के तौर पर काम करते थे। अब श्रीलंकाई नागरिक के हत्यारों का एक वीडियो सामने आया है जिसमें इन्हें हत्या की बात कबूल करते देखा जा सकता है।

यह वीडियो लेखक तारेक फतह ने ट्वीट किया है। इसमें भीड़ को- 'हजूर आपके नाम पर, जां भी कुर्बान'- का नारा लगाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, 'पाकिस्तान के सियालकोट में श्रीलंका के एक शख्स के हत्यारे गर्व के साथ शेखी बघार रहे हैं कि कैसे उन्होंने ईशनिंदा के संदेह पर उसे जिंदा जला दिया। हत्यारों में अपराध की सजा का कोई डर नहीं दिख रहा है।' उन्होंने लिखा, 'उनका दुस्साहस उनके पास मौजूद दंड से मुक्ति की भावना को दिखाता है।'

'गुस्ताखी करने वालों का सिर तन से किया जाएगा जुदा'
भीड़ में एक शख्स को कहते सुना जा सकता है, 'जो भी नबियों की शान में गुस्ताखी करेगा, उसका सिर तन से जुदा किया जाएगा।' सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी हुए जिसमें दिख रहा था कि श्रीलंकाई नागरिक के शव को घेरे सैकड़ों लोग खड़े हैं। वे टीएलपी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। सियालकोट के जिला पुलिस अधिकारी उमर सईद मलिक ने पत्रकारों से कहा कि श्रीलंका के नागरिक की पीट-पीटकर हत्या करने के बाद स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
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ईशनिंदा पर मौत की सजा का भी प्रावधानइस्लाम को बदनाम करने को लेकर पाकिस्तान में काफी कड़ा कानून है और इसमें मौत की सजा का भी प्रावधान है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन कानूनों का अकसर निजी दुश्मनी साधने में इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी सरकार के सलाहकार पैनल की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के किसी भी देश की तुलना में पाकिस्तान में सबसे अधिक ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल होता है।
लेखक के बारे में
योगेश मिश्रा
योगेश नवभारत टाइम्स डिजिटल में पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय खबरें आप तक पहुंचाते हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआती पढ़ाई यानी ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की और पोस्ट ग्रेजुएशन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) से किया। पत्रकारिता में अनुभव अब पांच साल के पड़ाव को पार कर चुका है। खबरों से इतर योगेश को साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। योगेश का मानना है कि पत्रकारिता भी साहित्य की एक विधा है जैसे रेखाचित्र या संस्मरण।... और पढ़ें

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