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Kargil War: पाकिस्‍तान के इस बहादुर सैनिक को आज भी सलाम करती है भारतीय सेना, जानें कौन थे शेर खान

कारगिल युद्ध (Kargil War) को 23 साल पूरे होने वाले हैं। जब-जब इस युद्ध का जिक्र होता है तब-तब पाकिस्‍तान (Pakistan) का धोखा भी याद आता है। इस युद्ध में यूं तो पाक को मुंह की खानी पड़ी थी लेकिन उसका एक सैनिक ऐसा था जिसकी बहादुरी को इंडियन आर्मी (Indian Army) ने भी सलाम किया था।

Curated byऋचा बाजपेई | एजेंसियां 7 Jul 2022, 5:01 pm

हाइलाइट्स

  • मई 1999 से जुलाई 1999 तक द्रास सेक्‍टर के कारगिल में भारत और पाकिस्‍तान की सेनाएं आमने-सामने थीं
  • कैप्‍टन करनाल ने टाइगर हिल पर मोर्चा संभाला था और उन्‍होंने बहुत बहादुरी से युद्ध का सामना किया।
  • उनके ढेर होने के बाद पाक सैनिक कमजोर हो गए और फिर भारत ने टाइगर हिल को हासिल कर लिया।
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लाहौर: पाकिस्‍तान के लाहौर में मंगलवार को कैप्‍टन कर्नल शेर खान को याद किया गया और उन्‍हें श्रद्धांजलि दी। कैप्‍टन करनाल को अगर आप नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि ये पाक आर्मी का वो एक बहादुर सैनिक था जिसे भारत की तरफ से भी सलाम किया गया था। इस सैनिक की बहादुरी का लोहा भारत ने भी माना था। युद्ध में अपनी जान गंवाने वाले इस सैनिक को भारतीय सेना के ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) एमपीएस बाजवा आज तक नहीं भूला पाए हैं। पाक में उन्‍हें 'कारगिल का शेर' कहते हैं और उन्‍हें निशान-ए-हैदर से भी सम्‍मानित किया जा चुका है। आपको बता दें कि मई 1999 से जुलाई 1999 तक द्रास सेक्‍टर के कारगिल में भारत और पाकिस्‍तान की सेनाएं आमने-सामने थीं और 26 जुलाई 1999 को ये संघर्ष खत्‍म हो सका था।

आज भी याद है कैप्‍टन की बहादुरी
कैप्‍टन करनाल ने टाइगर हिल पर मोर्चा संभाला था। यहां पर उन्‍होंने इतनी बहादुरी से युद्ध का सामना किया कि हर कोई देखता रह गया। टाइगर हिल पर हुए संघर्ष को ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा ने कमांड किया था। उन्‍हें आज भी याद है कि जब वो लड़ाई खत्‍म हुई तो कैसे वो एक पाकिस्‍तानी कैप्‍टन की बहादुरी के कायल हो चुके थे। उन्‍होंने कभी किसी पाक ऑफिसर को किसी लड़ाई में लीड करते हुए नहीं देखा था मगर कैप्‍टन शेरखान को देखकर वो हैरान रह गए थे। कैप्‍टन शेर खान, पाक की नॉर्दन लाइट इनफेंट्री के ऑफिसर थे। Imran Khan News: इमरान खान ने पाकिस्‍तानी सेना को दी धमकी, सत्‍ता पलटने की साजिश का खोल दूंगा राज
पाक ने टाइगर हिल की पांच जगहों पर कब्‍जा किया हुआ था और 18 ग्रेनेडियर्स को इसे फतह करने का जिम्‍मा सौंपा गया था। लड़ाई के समय कैप्‍टन शेर खान ने भारत के सैनिकों पर जवाबी हमला बोला। पहली बार में नाकाम हो गए थे मगर बाद भी फिर उन्‍होंने हमला किया। ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा को याद है कि वो पाक ऑफिसर बहुत ही लंबा-चौड़ा शख्‍स था जो बहुत बहादुरी से लड़ा था। उन्‍हें भारत के सिख सैनिक कृपाल सिंह ने मार गिराया था।

जेब से मिली थी चिट
उनके ढेर होने के बाद पाक सैनिक कमजोर हो गए और भारत ने टाइगर हिल को फिर से हासिल कर लिया। ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा के मुताबिक वहां पर 30 पाकिस्‍तानियों के शवों को दफनाया गया था। लेकिन शेरखान की डेडबॉडी को ब्रिगेड के हेडक्‍वार्टर पर रखा गया। उनकी जेब ये एक चिट निकली जिस पर लिखा था, 'कैप्‍टन कर्नल शेर खान ऑफ 12 एनएलआई हैज फ़ॉट वेरी ब्रेवली एंड ही शुड बी गिवेन हिज ड्यू।' उनके दादा ने 1948 के कश्मीर अभियान में भाग लिया था।

जब उनके शव को पाकिस्‍तान को वापस किया गया तो उस समय भी उनके साहस का जिक्र हुआ। कर्नल शेर खान का जन्‍म साल 1970 में पाक के स्‍वाबी में हुआ था। वो साल 1992 में पहले पाकिस्‍तान एयरफोर्स (पीएएफ) में बतौर एयरमैन शामिल हुए थे।14 अक्‍टूबर 1994 को वो पाक आर्मी की 27वीं सिंध रेजीमेंट में कमीशंड हुए थे। उनके दादा ने उन्‍हें कर्नल शेर खान नाम दिया था।
लेखक के बारे में
ऋचा बाजपेई
" मैंने साल 2021 में टाइम्‍स ग्रुप को ज्‍वॉइन किया और फिलहाल एनबीटी ऑनलाइन में अंतरराष्‍ट्रीय खबरों के सेक्‍शन की जिम्‍मेदारी निभा रही हूं। जर्नलिज्‍म में कुल अनुभव 15 साल का है और अंतरराष्‍ट्रीय मामलों के अलावा रक्षा और राष्‍ट्रीय राजनीति और मनोरंजन में भी रूचि है। "... और पढ़ें

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