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बेच दिया पीठ पर बना टैटू, मरने के बाद उतार लेंगे खाल

टिम स्टिनर ने करीब 10 साल पहले अपनी पीठ पर एक टैटू गुदवाया। इसे पूरा होने में 40 घंटे लगे। 2008 में यह टैटू जर्मनी के रिक रेनकिंग ने खरीदा। सौदे के मुताबिक, रिक की कला प्रदर्शनियों में टिम को अपनी शर्ट उतारकर टैटू का प्रदर्शन करना होता है। टिम की मौत के बाद उनकी खाल उतारकर उसे फ्रेम करा लिया जाएगा।

द इंडिपेंडेंट 6 Feb 2017, 11:47 am
ज़्यूरिक
नवभारतटाइम्स.कॉम man from zurich sells tattooed skin to immortalise it
बेच दिया पीठ पर बना टैटू, मरने के बाद उतार लेंगे खाल

टिम स्टिनर ने करीब 10 साल पहले बेल्जियम के एक मशहूर टैटू आर्टिस्ट विम डेलवोए से टैटू गुदवाया था। विम सूअरों पर अपने विवादित चित्रों के लिए काफी चर्चा में रहे हैं। टिम ने यह टैटू अपनी पीठ पर बनवाया। इस टैटू में कई चीजें उकेरी गई हैं। इसमें मडोना, एक खोपड़ी, एक गुलाब, मछली और कमल के फूलों के बीच खेलते-उछलते कुछ बच्चे उकेरे गए हैं। इस टैटू को पूरा बनाने में विम को करीब 40 घंटे का समय लगा। यह टैटू किसी बेहतरीन चित्रकारी जैसा ही था, लेकिन इसकी खासियत यह थी कि यह किसी कागज और कैनवस की जगह टिम के पीठ की त्वचा पर गुदा हुआ था।

साल 2008 में यह टैटू जर्मनी के कला प्रेमी रिक रेनकिंग को बेच दिया गया। रेनकिंग ने इसके एवज में जो रकम दी, उसका 40 फीसद हिस्सा टिम को मिला। आर्ट गैलरियों में रेनकिंग इस टैटू का प्रदर्शन करते हैं। टिम को इन प्रदर्शनियों में अपनी शर्ट उतारकर खड़ा होना पड़ता है। इस अनोखी कला के प्रदर्शन का सिलसिला टिम की मौत के बाद भी खत्म नहीं होगा। इस सौदे की एक शर्त के मुताबिक, मरने के बाद टिम की यह खाल निकाल ली जाएगी। फिर खाल के जिस हिस्से पर टैटू गुदा है, उसे फ्रेम कराकर रेनकिंग के कला संग्रहों में सुरक्षित रख दिया जाएगा। टिम की उम्र अब 40 साल है। वह कहते हैं, 'यह चित्रकारी मेरी पीठ पर है। मैं बस इसे लेकर इधर-उधर घूम रहा हूं। मेरी त्वचा अब रिक रेनकिंग की संपत्ति है। मेरी पीठ कैनवस है और मैं इसका अस्थायी फ्रेम हूं।'

कुछ लोगों को शायद यह अजीब लगे, लेकिन टिम का नजरिया अलग है। वह कहते हैं, 'यह बहुत पहले से चलन में है। जापान के टैटू इतिहास में ऐसा बहुत बार किया जा चुका है। अगर त्वचा को अच्छी तरह फ्रेम किया जाए और यह सुंदर दिखे, तो मुझे नहीं लगता कि ऐसा करने में कोई खराबी है।' टिम आगे कहते हैं, 'टैटू बनाने वाले भी बेहद शानदार कलाकार होते हैं, लेकिन उन्हें कला की दुनिया की दुनिया का हिस्सा नहीं माना जाता है। कैनवस पर चित्र बनाना एक बात है, लेकिन सूई की मदद से किसी की त्वचा पर चित्रकारी करना बिल्कुल अलग बात है।'

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