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परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रूस की लंबी छलांग, दुनिया के पहले फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर को किया एक्टिवेट

रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रोसाटॉम (Rosatom) ने दुनिया की पहली फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर को सक्रिय कर दिया है। रूसी एजेंसी का दावा है कि इससे अपेक्षाकृत सस्ती, सुरक्षित, कार्बन-मुक्त और लगभग कभी खत्म न होने वाली ऊर्जा मिलेगी।

नवभारतटाइम्स.कॉम 13 Jun 2021, 11:18 am
रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रोसाटॉम (Rosatom) ने दुनिया की पहली फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर को सक्रिय कर दिया है। रूसी एजेंसी का दावा है कि इससे अपेक्षाकृत सस्ती, सुरक्षित, कार्बन-मुक्त और लगभग कभी खत्म न होने वाली ऊर्जा मिलेगी। रूस भविष्य में बिजली और जैव ईंधन की बढ़ती खपत को कम करने के प्रयास में जुटा है। कोयले और डीजल-पेट्रोल के अधिक इस्तेमाल के कारण रूस के पर्यावरण को पिछले 50 साल में बहुत नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर को स्थापित करने पर ज्यादा जोर दे रहा है। 8 जून को रूसी स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोसाटॉम ने रूस के टॉम्स्क क्षेत्र में सेवरस्क में एक इनोवेटिव लेड कूल्ड BREST-OD-300 फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर को स्थापित किया है। यह रिएक्टर 300 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा को पैदा करने में सक्षम है।
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परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रूस की लंबी छलांग, दुनिया के पहले फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर को किया एक्टिवेट


IAEA ने इस रिएक्टर को बताया मील का पत्थर

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने भी इस रिएक्टर के स्थापित होने पर ट्वीट कर खुशी का इजहार किया। उन्होंने कहा कि आज हम ब्रेकथ्रू प्रॉजेक्ट के अंतर्गत बने रूस के BREST रिएक्टर की आधारशिला रखे जाने की खुशी मना रहे हैं। यह क्लोज्ड न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल की दिखा में एक बड़ी सफलता है। इससे परमाणु ऊर्जा के दौरान निकलने वाले अपशिष्टों को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस रिएक्टर को परमाणु उद्योग के लिए मील का पत्थर बताया।

रेडियोएक्टिव कचरे को निपटाने में मिलेगी मदद

रोसाटॉम की परियोजना "ब्रेकथ्रू" का उद्देश्य अडवांस फास्ट न्यूट्रॉन परमाणु रिएक्टरों के साथ एक क्लोज्ड न्यूक्लियर फ्यूल साइकल (सीएनएफसी) पर आधारित नया न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को विकसित करना है। फास्ट रिएक्टरों को प्राकृतिक यूरेनियम से ऊर्जा की पैदावार को बढ़ाने और न्यूक्लियर बॉयप्रोडक्ट्स के अलावा खर्च किए गए ईंधन का उपयोग करने की उनकी बढ़ी हुई क्षमता के लिए जाना जाता है। यह परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों को हजारों वर्षों तक विस्तारित करने में सहायता प्रदान करेगा। इतना ही नहीं, इससे रेडियोधर्मी कचरे की समस्या का भी हल होगा।

भारत समेत कई देश ऐसे रिएक्टर बनाने में जुटे

यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख परमाणु ऊर्जा संपन्न देश फास्ट रिएक्टरों को विकसित करने के काम में जुटे हुए हैं। इनमें चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। इन देशों में लगे हुए परमाणु रिएक्टर्स से पैदा हो रहा रेडियोधर्मी कचरा भविष्य के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में सभी देश अब अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी वाला फास्ट रिएक्टर बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

पनडुब्बियों में इस तकनीकी का इस्तेमाल कर चुका है रूस

लेड-कूल्ड फास्ट रिएक्टर की तकनीक का इस्तेमाल पहले सोवियत प्रोजेक्ट 705 लीरा अटैक सबमरीन में किया गया था। 1970 के दशक की शुरुआत में में बनी अत्याधुनिक हाई-स्पीड पनडुब्बियों को टाइटेनियम से बनाया गया था जिसमें पिघला हुआ सीसा-बिस्मथ द्वारा ठंडा एक कॉम्पैक्ट परमाणु रिएक्टर था। रूस ने पायलट-डिमॉन्स्ट्रेशन एनर्जी कॉम्प्लेक्स में एक न्यूक्लियर पावर प्लांट के साथ न्यूक्लियर फ्यूल रीप्रोसेसिंग प्लांट और फ्यूल रीफैब्रिकेशन प्लांट को एक साथ एक जगह पर स्थापित किया है। दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी देश ने इन तीनों प्लांट को एक साथ बनाया हो। अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस रूस की चौथी पीढ़ी का लेड-कूल्ड फास्ट रिएक्टर परमाणु ऊर्जा की दुनिया को बदलने में सक्षम है।

अबतक की सबसे अडवांस सुरक्षा तकनीकों से है लैस

1986 की चेरनोबिल आपदा और 2011 की फुकुशिमा दाइची तबाही ने परमाणु उद्योग की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े किए हैं। दो घातक दुर्घटनाओं से दुनिया भर के परमाणु इंजीनियरों ने सबक सीखा है। यही कारण है कि रूस के परमाणु रिएक्टर का निर्माण करने वाले इंजिनियरों ने सेफ्टी को पहली प्राथमिकता दी है। BREST-OD-300 रिएक्टर का हाई-बॉयलिंग, रेडिएशन प्रतिरोधी लो एक्टिवेटेड लेड कूलेंट पानी और हवा से मिलते ही निष्क्रिय हो जाएगा। इससे विस्फोट होने या रेडियोएक्टिव पदार्थों के लीकेज का खतरा नहीं होगा।

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