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3000 साल पुराने मकबरे से मिला 'सोने का खजाना', 11 साल से चल रही थी खुदाई

Gold Treasure: टीम इस साइट पर 2010 से काम कर रही है लेकिन दोनों मकबरों की खोज उन्होंने तीन साल पहले ही की थी। उसमें से भी एक मकबरे से खजाने की खोज हाल ही में की गई है।

Curated byयोगेश मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 3 Dec 2021, 4:01 pm
साइप्रस
नवभारतटाइम्स.कॉम gold in tomb
Photo : Twitter

नेफर्टिटी के शासनकाल के गहने कांस्य युग के दो मकबरों के भीतर से खोजे गए हैं, जो साइप्रस में 3000 सालों से छिपे हुए थे। जड़े हुए रत्नों के साथ कमल के फूल के आकार का एक ठोस सोने का पेंडेंट साइट पर पाए गए खजानों में से एक है। यह 18वें राजवंश की प्राचीन मिस्र की रानी के गहनों के समान है। पुरातत्वविदों का कहना है कि यह खोज और अन्य आभूषण साइप्रस में मिस्र के साथ गहन व्यापार की कहानी बताते हैं।

यह 2018 में छोटे भूमध्यसागरीय द्वीप पर खोजे गए दो मकबरों में से एक है। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग के पुरातत्वविदों ने इसके अंदर खजाने की खोज की है। भव्य गहनों के साथ टीम ने 155 व्यक्तियों के अवशेष और दो कब्रों में संयुक्त रूप से 500 वस्तुओं की एक टुकड़ी का भी खुलासा किया है। दोनों संरचनाओं का इस्तेमाल सैकड़ों सालों तक लगभग 1500 से 1350 ईसा पूर्व तक किया गया था।
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2010 से काम कर रही टीम
इसमें कंकाल और अंतिम संस्कार की वस्तुओं को एक-दूसरे के ऊपर रखा गया था। कंकालों में से एक पांच साल के बच्चे का था, जिसे भारी मात्रा में गहनों के साथ दफनाया गया था। इसमें सोने का एक टियारा और हार भी शामिल था। यह बच्चा संभवतः किसी कुलीन परिवार का हिस्सा था। टीम इस साइट पर 2010 से काम कर रही है लेकिन दोनों मकबरों की खोज उन्होंने तीन साल पहले ही की थी।

मकबरों में बने हुए हैं अंडरग्राउंड चैंबरमकबरों में अंडरग्राउंड चेंबर बने हुए हैं और प्रत्येक में बड़ी संख्या में मानव कंकाल पाए गए हैं। पुरातत्वविदों ने एक बयान में कहा कि चार सालों तक खोज के प्रबंधन के लिए बहुत ही नाजुक काम की आवश्यकता थी। क्योंकि नमकीन मिट्टी में 3000 से अधिक सालों के बाद हड्डियां बेहद नाजुक हो जाती हैं। एक बार जब टीम अवशेषों और कलाकृतियों की छानबीन करने में सक्षम हो गई तो उन्होंने सैकड़ों कंकालों और खजाने का खुलासा किया।
लेखक के बारे में
योगेश मिश्रा
योगेश नवभारत टाइम्स डिजिटल में पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय खबरें आप तक पहुंचाते हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआती पढ़ाई यानी ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की और पोस्ट ग्रेजुएशन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) से किया। पत्रकारिता में अनुभव अब पांच साल के पड़ाव को पार कर चुका है। खबरों से इतर योगेश को साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। योगेश का मानना है कि पत्रकारिता भी साहित्य की एक विधा है जैसे रेखाचित्र या संस्मरण।... और पढ़ें

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