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ऑस्ट्रेलिया में मिलीं 40 करोड़ साल पुरानी कीड़ों की दो प्रजाति, खास कवच से करते थे अपनी सुरक्षा

Worm Fossils : वैज्ञानिकों ने 40 करोड़ साल पुराने जीवाश्म का कवच तैयार किया है। इसके लिए उन्होंने माइक्रो-सीटी तकनीक का इस्तेमाल किया। समय के साथ कीड़ों के कवच धीरे-धीरे विलुप्त हो गए।

Curated byयोगेश मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 3 Dec 2021, 1:34 pm
कैनबरा
नवभारतटाइम्स.कॉम worm fossil
Photo : University of Missouri

वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया में कीड़ों की दो नई प्रजातियों की खोज की है जो लगभग 400 मिलियन (40 करोड़) साल पुराने हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी में सारा जैक्वेट के नेतृत्व में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम को यह कामयाबी हासिल हुई है। इन प्रजातियों के नाम लेपिडोकोलियस कैलीबर्नस और लेपिडोकोलियस शुरीकेनसह है। एमयू एक्स-रे माइक्रोएनालिसिस कोर फैसिलिटी की माइक्रो-सीटी इमेजिंग क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए, शोधकर्ताओं ने प्राचीन कीड़ों के कवच प्लेटों के 3डी-मॉडल बनाए हैं।

प्राचीन कीड़ों के कवच वाले कंकालों को 'माचेरिडियन' कहा जाता है। एमयू कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस में भूवैज्ञानिक विज्ञान के असिस्टेंट प्रफेसर जैक्वेट का मानना है कि यह अध्ययन वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद करेगा कि पूरे जीवाश्म रिकॉर्ड में जैविक बायोलॉजिकल आर्मर्ड सिस्टम कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि माइक्रो-सीटी का इस्तेमाल करके हम कवच के अलग-अलग हिस्सों को बना सकते हैं।
खोज: वैज्ञानिकों को मिला जमीन पर रहने वाले सबसे पहले जानवर का जीवाश्म
धीरे-धीरे विलुप्त हो गया कवच
जैक्वेट ने कहा कि इससे हमें यह जानने में मदद मिलेगी कि इस कवच ने कीड़ों की सुरक्षा कैसे की, जो दुर्भाग्य से जीवाश्म रिकॉर्ड के विलुप्त होने के दौरान गायब हो गए। इसी तरह पिछले साल वैज्ञानिकों को स्कॉटलैंड में 425 मिलियन साल पहले रहे एक millipede (कनखजूरे जैसा जीव) के जीवाश्म मिले थे। माना जा रहा था कि यह जमीन पर रहने वाले सबसे पहले जानवरों में से एक था। इसके बाद जानवरों का धरती पर विकास होता रहा है।

धरती के पहले कीड़े का जीवाश्मKampecaris obanensis नाम के millipede का जीवाश्म स्कॉटिश इनर हेब्रीड्स के करेरा टापू में मिला था। ये झीलों के किनारे सड़ने वाले पौधों के आसपास रहते थे। ये आज पाए जाने वाले millipeds जैसे ही थे लेकिन इनके पूर्वज नहीं थे। जीवाश्म में इसके पैर नहीं मिले हैं। माना जा रहा है कि यह arthropod की श्रेणी में आते हैं जिनमें कीड़े, मकड़े, केकड़े आदि थे।
लेखक के बारे में
योगेश मिश्रा
योगेश नवभारत टाइम्स डिजिटल में पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय खबरें आप तक पहुंचाते हैं। इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआती पढ़ाई यानी ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की और पोस्ट ग्रेजुएशन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ) से किया। पत्रकारिता में अनुभव अब पांच साल के पड़ाव को पार कर चुका है। खबरों से इतर योगेश को साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। योगेश का मानना है कि पत्रकारिता भी साहित्य की एक विधा है जैसे रेखाचित्र या संस्मरण।... और पढ़ें

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