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नई खोज: जब एग और स्पर्म मिलते हैं तब पैदा होता है प्रकाश

क्या आप जानते हैं कि मनुष्य की ज़िन्दगी की शुरुआत कैसे होती है? इसकी शुरुआत होती है प्रकाश से। जी हां, और यह प्रकाश पैदा होता है स्पर्म और एग के मिलन से। वैज्ञानिकों ने पहली बार इस खूबसूरत मिलन का विडियो कैप्चर करने में कामयाबी पाई है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 29 Apr 2016, 9:39 am
क्या आप जानते हैं कि मनुष्य की ज़िन्दगी की शुरुआत कैसे होती है? इसकी शुरुआत होती है प्रकाश से। जी हां, और यह प्रकाश पैदा होता है स्पर्म और एग के मिलन से। वैज्ञानिकों ने पहली बार इस खूबसूरत मिलन का विडियो कैप्चर करने में कामयाबी पाई है।
नवभारतटाइम्स.कॉम tiny sparks show beginning of a new life when egg and sperm meet
नई खोज: जब एग और स्पर्म मिलते हैं तब पैदा होता है प्रकाश


द टेलिग्राफ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ठीक कन्सीव करते समय एग में से छोटी चिंगारियां निकलती हैं। इससे पहले ऐसा वैज्ञानिकों ने जानवरों में देखा था, लेकिन पहली बार ऐसा मनुष्यों के साथ भी होता नजर आया है।

एक नई खोज के रूप में यह मिलन न सिर्फ नई जिंदगी शुरू होने का एक बेहद खूबसूरत नजारा है, बल्कि इस फ्लैश का साइज फर्टिलाइज हुए एग की क्वॉलिटी भी बताता है।

शिकागो की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने पाया कि स्पर्म से संपर्क में आने पर कुछ एग ज्यादा चमकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पैदा होने वाले बच्चे के स्वस्थ होने की संभावना ज्यादा होने का गुण है। इस खोज से फर्टिलिटी डॉक्टरों को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के दौरान बेस्ट फर्टिलाइज्ड एग्स चुनने में मदद मिल सकती है।

इस स्टडी के दो सीनियर ऑथरों में से एक और नॉर्थवेस्टर्न में ओवरियन बायॉलजी एक्सपर्ट प्रोफेसर ट्रीजा वुडरफ ने कहा, 'यह असाधारण था। हमने चूहों में जिंक स्पार्क को 5 साल पहले देखा था। प्रत्येक मानव एग से जिंक को रेडिएट होते देखना बहुत खूबसूरत था। इसका मतलब है कि अगर आप फर्टिलाइजेशन के वक्त स्पार्क देख सकते हैं, तो आप तुरंत जान लेंगे कि कौन से अंडे IVF के लिए अच्छे रहेंगे।'

फिलहाल करीब 50% फर्टिलाइज एग ठीक से विकसित नहीं हो पाते और एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका कारण गलत जेनेटिक कोड हैं।

यह तेज प्रकाश इसलिए उठता है, क्योंकि जब स्पर्म एग में प्रवेश करता है तो तेजी से कैल्शियम पहुंचता है, जिससे एग में मौजूद ज़िंक तुरंत ट्रिगर हो जाता है। जैसे ही ज़िंक बाहर निकलता है, वह छोटे मॉलेक्यूल्स में बंट जाता है जिनसे रोशनी होती है और कैमरा माइक्रोस्कोप्स में कैद हो जाती है।

यह स्टडी 26 अप्रैल को सायेंटिफिक रिपोर्ट्स में छापी गई।

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